साहित्य
वैलेंटाइन वीक ट्रेंड नहीं, रिश्तों की समझ
वैलेंटाइन वीक को अब तक केवल दिखावा समझा जाता रहा है, लेकिन रिश्तों की बदलती समझ में इसका एक नया अर्थ सामने आया है. Rose Day से लेकर Valentine’s Day तक, इस पूरे सप्ताह का हर दिन अलग-अलग love language को दर्शाता है, जो यह बताता है कि लोग प्यार को महसूस और व्यक्त कैसे करते हैं. यही वजह है कि युवा वर्ग के बीच वैलेंटाइन वीक अब भावनाओं को समझने और रिश्तों को मजबूत करने का एक आधुनिक माध्यम बनता जा रहा है.
वैलेंटाइन डे जरूरी नहीं, प्यार रोज़ होना चाहिए
महंगे गिफ्ट और सोशल मीडिया दिखावे से हटकर आज के कपल्स प्यार को नए तरीके से जी रहे हैं. माइक्रो रोमांस यानी रोज़मर्रा के छोटे-छोटे पल अब मजबूत रिश्तों की असली पहचान बन रहे हैं. जानिए क्यों सुरक्षित और सच्चे प्यार को वैलेंटाइन डे की जरूरत नहीं होती.
‘नाटक’
यह दार्शनिक कविता जीवन को एक सराय और सुख-दुख को एक नाटक के रूप में प्रस्तुत करती है। ‘मैं’ और अहंकार के मंथन के बीच यह रचना कर्म, परिवर्तन और प्रेम की त्रिवेणी का संदेश देती है। जीवन की क्षणभंगुरता और आत्मबोध की रोशनी को उजागर करती यह कविता पाठक को भीतर झाँकने के लिए प्रेरित करती है।
प्रेम का आगमन
“प्रेम का आगमन” एक ऐसी भावनात्मक कविता है जो प्रेम के प्रथम स्पर्श की सुगंध, मिलन की उजली आभा और विरह की गहरी पीड़ा तीनों अवस्थाओं को संवेदनशील शब्दों में चित्रित करती है। यह रचना बताती है कि प्रेम जीवन में उजाला और पूर्णता लाता है, परंतु बिछड़ने पर वही स्मृतियाँ आत्मा को झकझोर देती हैं। प्रेम की मधुरता और उसके बाद की रिक्तता का यह मार्मिक चित्रण पाठक के हृदय को छू जाता है।
याद आता है पुराना जमाना
यह कविता बचपन की उन सरल और सच्ची यादों को जीवंत करती है, जब नानी का गाँव, चूल्हे की रोटी, नीम की छाँव, पाठशाला के संस्कार और बिजली जाने पर चिमनी की रोशनी जीवन का हिस्सा थे। “याद आता है पुराना जमाना” सिर्फ स्मृतियों का वर्णन नहीं, बल्कि उस सादगी, अपनापन और संस्कारों की दुनिया की भावनात्मक पुनर्स्मृति है, जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कहीं पीछे छूट गई है।
महात्मा गांधी आगमन की शताब्दी पर राष्ट्रीय समारोह
भागलपुर में महात्मा गांधी के आगमन की शताब्दी पर राष्ट्रीय स्तर पर बहुआयामी समारोह आयोजित किए जाएंगे। गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र गुप्ता ने घोषणा करते हुए बताया कि कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को गांधी के विचारों और मूल्यों से जोड़ा जाएगा। झारखंड तक निकली गांधी स्मृति यात्रा में प्रो. मनोज कुमार, डॉ. मनोज मीता और प्रसून लतांत सहित कई गांधीवादी कार्यकर्ता शामिल रहे।
मानवता..
यह कविता मानवता को एक जीवंत स्वर में प्रस्तुत करती है—जो कभी समाज की आत्मा थी, आज उपेक्षा और कठोरता के बीच संघर्ष कर रही है। फिर भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी मानवता को अपने कर्म, साहस और संवेदना से जीवित रखे हुए हैं। यह रचना पाठक को याद दिलाती है कि मानवता के बिना संसार का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
जन्मदिन की सौगात
यह बाल कविता जन्मदिन के उत्सव को केवल केक और उपहारों तक सीमित न रखकर, उसे संस्कार, सेवा और करुणा से जोड़ती है। पेड़ लगाना, पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम, बड़ों का सम्मान और सादगीपूर्ण जीवन जैसे मूल्य इस रचना को बच्चों के लिए शिक्षाप्रद और प्रेरक बनाते हैं।