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सम्मान की सूखी रोटी

मैंने तुम्हारी बातों में आकर अपना परिवार छोड़ दिया और तुमने मुझे धोखा दिया,” प्रियांशी के स्वर में टूटे हुए सपनों की गूंज थी। लेकिन जवाब में जो मिला, वो और भी ज़्यादा चुभने वाला था – “तुम जैसी औरतों की कोई इज्जत नहीं…”

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प्रयागराज: जहाँ जल भी मोक्ष का द्वार बनता है

प्रयागराज—तीर्थों का राजा, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का त्रिवेणी संगम आत्मा को छू लेने वाला अनुभव बन जाता है। यह केवल नदियों का मिलन नहीं, श्रद्धा और सनातन परंपरा की धारा है। संगम में एक डुबकी, जीवन के सभी द्वंद्वों से मुक्ति और शांति का मार्ग प्रशस्त करती है। नाव की धीमी चाल, मंत्रों की गूंज और जल पर तैरते दीप—यह एक ऐसी यात्रा है, जो हृदय को भीतर तक शांत कर देती है।

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स्वप्न और प्रेम के एहसास को दर्शाती हिंदी कविता

साक्षी

एक स्वप्न, जो केवल देखा नहीं जाता — बल्कि देखा जाता है, उसे देखते हुए। यह कविता दृष्टि, अनुभूति और अस्तित्व की उस हल्की परत को छूती है जहाँ देखने और देखे जाने की सीमाएँ धुंधली हो जाती हैं।

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“आसान हो जाए सफ़र”

मेरी क़िस्मत में तेरा साथ अगर हो जाएज़िंदग़ी का मेरा आसान सफ़र हो जाएऔर कुछ भी नहीं ख़्वाहिश मेरी अब इसके सिवामेरे महबूब की बस मुझ पे नज़र हो जाए.

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प्रेम की छोटी सी सल्तनत

एक छोटी-सी सल्तनत, कुछ किताबें, एक बिस्तर और दो दिल—इस कहानी में प्रेम के वे पल कैद हैं जो हँसी और आँसुओं के बीच कहीं मुकम्मल होते हैं। कभी झिझक, कभी झेंप, और एक आलिंगन—जो बरसों बाद भी उतना ही सुकून देता है जितना पहली बार।

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पलाश के सामने एक खिड़की

नगर-सीमान्त पर जहाँ मेरा बसेरा है, उसके ठीक सामने पलाश का एक पेड़ है… जब से उस पर पलाश के अंगारे खिले हैं, मन शरविद्ध हरिण की भाँति बार-बार वहीं चला जाता है। जैसे फूल रौशनी हों। और फूलों का न होना रात्रितिमिर, जिसमें पेड़ आँख से ओझल हो जाएं… वसंत से बड़ा निर्मोही कौन है?

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“इश्क़, एल्कोहल और ऑक्सीटोसिन

नब्बे का दशक इश्क़, संगीत और साइंस की जुगलबंदी का दौर था — जब रिकी मार्टिन दिलों पर राज कर रहे थे और वैज्ञानिक प्यार का फार्मूला गढ़ रहे थे। यह लेख उस मोहब्बती समय की एक संवेदनशील, हास्य-विनोद और आत्ममंथन से भरी झलक है।

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जब काली बिल्ली ने मेरा मन पढ़ लिया

“यह कहानी एक अकेले रहने वाले व्यक्ति और एक रहस्यमयी काली बिल्ली के बीच बनते एक अनोखे, गहरे और आत्मीय रिश्ते की है। कुछ दिनों का यह साथ न सिर्फ उसकी बिल्ली पालने की इच्छा पूरी करता है, बल्कि यह एहसास भी देता है कि कभी-कभी जानवर हमारे मन की बात हमसे पहले जान लेते हैं।”

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…अगर ज़िंदगी फिर से मुड़ जाए

इस कविता में एक स्त्री अपने जीवन के उस मोड़ पर खड़ी होकर गुज़रे समय को फिर से जीने की ख्वाहिश करती है — वो अधूरे सपने, वो रिश्ते, वो बचपन की अलमारी, और माँ की बातें… सब कुछ एक बार फिर सहेजने की उम्मीद लिए। यह एक आत्ममंथन है, एक नई शुरुआत की ओर बढ़ने का भावुक आह्वान।”

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