बेटा,
दिल का टुकड़ा होकर भी तुझे खुद से कोसों दूर भेजना हमारी सबसे बड़ी मजबूरी है। लेकिन तेरी तरक्क़ी और तेरी खुशियों के लिए, हम अपने कलेजे पर पत्थर रखकर तुझे नए माहौल, नए परिवेश में भेजते हैं। हमें पता है, आसान तेरे लिए भी नहीं होगा।
कभी आज़ादी का एहसास तुझे गुदगुदाएगा, तो कभी जिम्मेदारियों का बोझ तुझे डराएगा। पर याद रखना, हर पल हमारे आशीर्वाद और दुआएं तेरे चारों ओर एक अदृश्य कवच बनाकर खड़ी रहेंगी।
तू जहाँ भी रहेगा, अपने संस्कारों की जड़ों को सींचते रहना। हमारे प्यार को याद कर पाना, क्योंकि दूर रहकर भी हम हर पल तेरे आसपास ही रहेंगे।
बेटा, घर से दूरी को बोझ मत समझना, उलझनों को अपने दिल में मत दबाना। जो भी हो, हमसे कहना—क्योंकि तेरा दुख ही हमारा दुख है और तेरी मुस्कान ही हमारी खुशी।
हमें तुझसे ज़्यादा कुछ नहीं चाहिए, बस तेरी सलामती चाहिए।
हमारे दिन तेरे ख्यालों से शुरू होते हैं और रातें तेरे ख्यालों में ही ढल जाती हैं।
दोस्तों की भीड़ में खुद को खो मत देना,
क्योंकि तू ही है मम्मी-पापा के जीने का सबसे बड़ा सहारा… सबसे बड़ा बहाना।

मधु चौधरी, लेखिका, रिसर्च असिस्टेंट, विल्सन कॉलेज, मुंबई

Akhe bhar ayi
Bohot atcha laga parhke
Shukriya rekha ji
Bahut hi khub likha hai!!
अति सुन्दर रचना