
शारदा कनोरिया, पुणे
हिंदी मन की भाषा कहती,
हिंदी दिल की बात,
इसके अक्षर-अक्षर में है
माटी की सौगात।
माँ की मीठी लोरी बनकर
मन में उतर जाती,
दादी की उन कथा-कहानियों में
बचपन फिर मुस्काता।
आँचल की खुशबू-सी लगती,
अपनों का अहसास,
हिंदी में जब मन बोल उठे तो
मिलता खुद से विश्वास।
हिंदी मन की भाषा कहती,
हिंदी दिल की बात,
इसके अक्षर-अक्षर में है
माटी की सौगात।
यह केवल शब्दों का स्वर नहीं,
यह भावों की पहचान,
इसमें संस्कृति साँसें लेती,
इसमें अपना हिंदुस्तान।
दूर देश में जब कोई अपना
हिंदी में मुस्काता है,
परदेसों की भीड़ में जैसे
घर-आँगन मिल जाता है।
यह रिश्तों की गरमाहट है,
यह प्रेमिल संवाद,
हिंदी से ही जुड़ जाता है
मन का हर अवसाद।
जो बात नयन कह नहीं पाए,
हिंदी कह दे आज…
शब्द नहीं, यह आत्मा का है
सबसे सच्चा साज।
हिंदी मन की भाषा कहती,
हिंदी दिल की बात,
जब तक धड़के हिंद का दिल,
जीवित रहे यह मात।
आओ इसकी लौ जलाएँ,
घर-घर दीप जलाएँ,
अपने बच्चों के अधरों पर
हिंदी गीत सजाएँ।
हिंदी केवल भाषा न हो—
बन जाए विश्वास,
माँ की तरह सदा हृदय में
रहे इसका निवास।
हिंदी मेरी साँसों में है,
हिंदी मेरा मान,
हिंदी से पहचान मेरी,
हिंदी से हिंदुस्तान।
हिंदी मन की भाषा कहती,
हिंदी दिल की बात,
हिंदी रहे तो जीवित रहे
अपनी मिट्टी, अपने जज़्बात।
