हाँ, मैं श्रमिक हूँ

सूर्योदय के समय निर्माण स्थल पर खड़ा एक भारतीय श्रमिक, चेहरे पर थकान और गर्व के भाव, मेहनत और संघर्ष का प्रेरक दृश्य।

स्वरा सुरेखा अग्रवाल (उत्तरप्रदेश)

हाँ, मैं श्रमिक हूँ,
घर से बेघर हूँ।
रूह से आज़ाद, पर
अपने काम में खुश हूँ…

माना…
खाते में नहीं आती
मेरी छुट्टियाँ,
इसलिए शायद
मनाता नहीं मैं छुट्टियाँ।

इंतज़ार में रहतीं
मेरी कई चिट्ठियाँ,
पसीने से तर-बतर
दिन मेरे,
थक के चूर रहती
रातें मेरी।

स्वप्न में ज़िंदा मेरे ख्वाब,
अक्सर तन्हा मेरे ख्याल।
बेबस मैं और मेरा परिवार,
दिवाली-होली बस थोड़ा आराम,
इसलिए शायद मेरा श्रमिक नाम…

रोज सुबह-शाम भागा-दौड़ी,
मेहनत से चलती मेरी गाड़ी।
सुबह-शाम बस काम ही काम,
इसलिए शायद मेरा श्रमिक नाम..स्वरा

2 thoughts on “हाँ, मैं श्रमिक हूँ

  1. दिली शुक्रिया टीम

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