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“कंधों पर दुनिया, आँखों में समंदर”

अवंतिका विशाल अवि, प्रसिद्ध लेखिका, लुधियाना

वो ज़ुबां से नहीं बोलते,
बोलती हैं उनकी आँखें
बेहद प्यार छिपाए बैठे,
फ़िक्र से भरी उनकी रातें।

ज़िम्मेदारी और फ़र्ज़ से दबे,
हाथों में ढेरों बरकत,
झुके हुए उनके दोनों काँधे,
और पैरों में बेशुमार ताकत।

परिवार को दर्द में देख
परेशान हो जाते हैं,
आँखों की नमी छिपाते हैं,
पर कभी दिखाते नहीं हैं।

घर की वो जड़ होते हैं,
पेड़ की तरह छाया देते हैं,
खुद को भूल जाते हैं,
सिर्फ़ सबकी ख़ुशी देखकर।

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