पुनर्जन्म…

बस से मसूरी की यात्रा पर निकली साक्षी अपने परिवार के साथ मंदिर पहुँचती है। जैसे ही वह मंदिर के अहाते में कदम रखती है, एक बूढ़ा व्यक्ति उसे देखकर दौड़ा चला आता है और कहता है — “बिटिया, तू आ गई! मैं तेरा इंतज़ार कर रहा था।”
सब हैरान रह जाते हैं। बूढ़ा एक पुरानी तस्वीर दिखाता है . उसमें साक्षी जैसी ही एक लड़की थी, नाम लिखा था “नूरी”। बूढ़े की आँखों में आँसू हैं, और साक्षी के मन में एक अनजाना कंपन।
क्या यह महज़ संयोग है, या सचमुच किसी पुनर्जन्म की कहानी शुरू हो चुकी है?

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ब्लडी मून

ब्लडी मून का दृश्य अद्भुत था। शाम होते ही याद आया कि आज चंद्रग्रहण है और चाँद धीरे-धीरे लाल होने लगेगा। महीनों से धूल खाई कैमरे की बॉडी और लेंस को तैयार किया गया, लेकिन वास्तविक लालिमा को देखने और कैद करने के लिए धैर्य और जुगाड़ की ज़रूरत पड़ी। छत पर पहुँचकर, चाँदनी की बिखरी रोशनी और धीरे-धीरे ग्रहण में ढकता चाँद, एक रहस्यमय और मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।

पूरे ग्रहण और लाल चाँद को देखने के बीच, पारिवारिक जीवन, तकनीकी सीमाएँ और डिजिटल युग की जुगाड़ कहानी भी साथ चल रही थी। हाथ में कैमरा, iPhone शॉट्स और तख़्त पर टिकाई डंडी की मदद से आखिरकार कुछ तस्वीरें इतिहास में कैद हो गईं। यह केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि धैर्य, तैयारी और अद्भुत दृश्य का मिश्रण था।

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