बच्चों का बदलता व्यवहार
बचपन के वो दिन अब दूर हो गए जब बच्चे मां के आंचल में सुकून ढूंढते और पिता की बातों में जीवन का ज्ञान पाते। गलियों और मैदानों में खेल, दादी-नानी की कहानियाँ और माता-पिता का आदर अब कहीं खो सा गया है। आज बच्चे मोबाइल की स्क्रीन और डिजिटल दुनिया में खोए हुए हैं।पहले जैसा प्यार और सम्मान अब कम नजर आता है, माता-पिता की सीख बोझ लगती है और संस्कार भूलते जा रहे हैं। पढ़ाई का दीपक मंद पड़ता है और सपनों का आंगन सिकुड़ता है।
फिर भी उम्मीद बाकी है। यदि माता-पिता बच्चों को प्यार और समझ से मार्गदर्शन देंगे, तो उनका भविष्य और संस्कार फिर से चमकने लगेंगे।
