gulmohar
विरह में डूबी युवती, पायल और कंगन पहने, चाँदनी रात में खिड़की के पास बैठी, आँखों से अश्रुधारा बहती हुई, उदासी और प्रतीक्षा का गहरा भाव।

कैसे आऊँ मैं तुमसे मिलने…

यह रचना और दृश्य विरह के उस क्षण को दर्शाते हैं, जहाँ श्रृंगार, आभूषण और सपने सब धुल चुके हैं, और केवल प्रतीक्षा शेष है। पायल की झंकार और कंगनों की आवाज़ मन की उलझनों का प्रतीक बन जाती है। चाँदनी रात, कोरा काग़ज़ और पहरेदार बनी उदासी सब मिलकर प्रेम की उस पीड़ा को रचते हैं, जहाँ मिलने की चाह सबसे बड़ी व्याकुलता बन जाती है।

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