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ईश्वर से ऊँचा स्थान तुम्हारा

ईश्वर से ऊँचा स्थान तुम्हारा, देते हो सबको सद्ज्ञान।किसी तरह का भेद न करते, तुम पर हमको अभिमान।। जो भी आया शरण तुम्हारी, उसको तुमने अपनाया।जड़-मूरख मन में भी, तुमने ज्ञान का दीप जलाया।सदा सिखाया बच्चों को करना आदर-सम्मान।ईश्वर से ऊँचा स्थान तुम्हारा, देते हो सबको सद्ज्ञान।किसी तरह का भेद न करते, तुम पर हमको…

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चीत्कार पर मौन है ज़माना

आज की राजनीति और सत्ता की भूख इतनी बेकाबू हो चुकी है कि उसने जनता की रोटी, ज़मीन और नौकरी तक निगल ली है। शासक वर्ग सबकुछ हड़पने के बाद भी संतुष्ट नहीं होता, मानो उन्हें किसी डकार तक की परवाह नहीं। आम इंसान का संघर्ष, उसका भूख-प्यास से जूझना, उनके लिए महज़ एक आँकड़ा या ख़बर बनकर रह गया है।

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