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हरियाली तीज : हरियाली, सौंदर्य और आस्था का पर्व

श्रावण मास की हरियाली और वर्षा ऋतु की ताजगी के बीच मनाया जाने वाला हरियाली तीज पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी शक्ति, सौंदर्य और सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव भी है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में मनाए जाने वाले इस पर्व में महिलाएँ निर्जला व्रत रखती हैं, पारंपरिक श्रृंगार करती हैं, लोकगीतों की स्वर लहरियाँ बिखेरती हैं और झूले की लय में प्रकृति से जुड़ती हैं। इस दिन महिलाएँ हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेंहदी रचाती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और पारंपरिक आभूषणों से सजती हैं। हरे रंग को इस पर्व का विशेष रंग माना जाता है, जो हरियाली, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है। महिलाएँ एक-दूसरे के घर जाकर लोकगीत गाती हैं, पारंपरिक नृत्य करती हैं और झूले झूलती हैं, जो सावन के इस त्योहार की एक विशिष्ट पहचान है।

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