दर्द और अकेलेपन की भावना दर्शाती हिंदी कविता का भावनात्मक दृश्य

व्यथा

यह कविता मन के अनकहे दर्द, रिश्तों की टूटन, सामाजिक कलुषता और भीतर पसरे परिताप को संवेदनशील शब्दों में व्यक्त करती है। हर पंक्ति एक ऐसे मन की आवाज़ है जो कहना भी चाहता है और छिपाना भी।

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जहाँ शब्द नहीं थे, वहाँ माही थी…

माही कोई साधारण लड़की नहीं थी।वह शब्दों से पहले सिसकियाँ समझती थी।घायल पशु हों या खामोश इंसान उसका मन हर पीड़ा पर ठहर जाता।
संवेदनाएँ उसकी कमजोरी नहीं, उसकी सबसे बड़ी ताकत थीं।

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स्वाभिमान

हर रोज मैट्रो स्टेशन पर भीख मांगती वह अंधी भिखारन मेरी नजरों के सामने होती।
एक दिन उसकी तबियत ठीक न होने पर मैंने देखा कि उसकी देखभाल एक जवान लड़की कर रही थी। कई सालों के दर्द और असहायता के बावजूद, उस बच्ची ने उसकी सेवा को अपना स्वाभिमान बना लिया। भीख मांगना नहीं, बल्कि सहयोग और मानवता की यही असली पहचान है।

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