कल्पना

“परिस्थितियाँ कर्माधीन होती हैं, पर खुशियाँ इंसान के साहस और स्वीकार भाव से जन्म लेती हैं। होली के रंगों ने कल्पना की सूनी ज़िंदगी में फिर से प्रेम और उम्मीद के रंग भर दिए।”

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