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मंजिल मिल ही जायेगी

मंजिल पाने के लिए निरंतर प्रयास और पूरे विश्वास के साथ कदम बढ़ाते रहना ही सबसे महत्वपूर्ण है। चाहे रास्ते में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ, या कश्तियों में छेद हों, लेकिन हौसला और रवानगी कभी कम नहीं होती। अंधकार में बिखरे जाल और पाश हमारी कोशिशों को रोकने की कोशिश करेंगे, पर जज्बे की शमा जलाकर हम उनसे मुक्त हो सकते हैं।

हर तिनका, हर छोटा प्रयास मिलकर एक मजबूत घोंसला बनाता है, और आंधियों में भी यह हौंसला कायम रहता है। मुश्किलें देखने के बाद भी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि मेहनत, अभ्यास और लगन से हर समस्या का हल निकलता है।

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धैर्य का प्रतिफल

यह कविता धैर्य और perseverance का संदेश देती है। जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, समय, लगन और सही प्रयास से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। कवि ने साधारण उदाहरणों — पक्षियों का धीरे-धीरे नीड़ बनाना, पर्वत चढ़ाई, अर्जुन की वीरता — के माध्यम से समझाया है कि धैर्य एक ऐसा गुण है, जो अंततः सफलता और फल की प्राप्ति कराता है। यह कविता आत्म-प्रेरणा और मानसिक दृढ़ता की भावना को गहरे रूप में उजागर करती है।

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