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उर्दू साहित्य में रामकथा और भारतीय सांस्कृतिक समन्वय को दर्शाता चित्र।

भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक समन्वय की धरोहर : उर्दू में रामकथा

रामकथा केवल एक धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक एकता और साहित्यिक समन्वय की जीवंत परंपरा है। डॉ. अजय मालवीय द्वारा संकलित ‘उर्दू में रामकथा’ में उर्दू और फ़ारसी के रचनाकारों ने राम, सीता और रामायण के विभिन्न प्रसंगों को अपनी शायरी और साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया है।

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तुलसीदास: एक ताने ने जिसे बना दिया युगों का संत

भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना में जब भी भक्ति और आध्यात्मिक साहित्य की बात होती है, गोस्वामी तुलसीदास का नाम श्रद्धा और गौरव के साथ लिया जाता है. वे न केवल एक संत, एक कवि और एक भक्त थे, बल्कि आध्यात्मिक क्षेत्र के ऐसे युगपुरुष भी थे जिन्होंने अपनी रचनाओं से भारतीय समाज की आत्मा को गहराई से स्पर्श किया.
लगभग 500 वर्ष पूर्व भारत में मुगल शासन की नींव पड़ चुकी थी. इसी काल में उत्तरप्रदेश के बांदा ज़िले के ग्राम राजापुर में रामबोला नामक बालक का जन्म हुआ.

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