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तन्हाई और प्रेम के एहसास को दर्शाती हिंदी कविता

 “मुझे फ़र्क नहीं पड़ता”

कभी किसी की मौजूदगी सुकून देती है, लेकिन उसकी गैरमौजूदगी जिंदगी को रोक नहीं पाती। यह कविता प्रेम, आत्मनिर्भरता, तन्हाई और खामोशी के उसी खूबसूरत एहसास को शब्द देती है।

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