पुलवामा के बाद की एक माँ की कश्मीर डायरी

यह एक माँ की हिम्मत, आत्मविश्वास और अनुभवों की कहानी है — जो अपने दो बच्चों के साथ अकेले कश्मीर की वादियों में निकल पड़ी। पुलवामा की घटना के बाद जब डर और संदेह ने मन को जकड़ रखा था, तब भी उसने फैसला किया कि ज़िंदगी के इस अवसर को हाथ से जाने नहीं देगी। डर के उस पार फैली थी बर्फ़ से ढकी पहाड़ों की शांति, मेहमाननवाज़ लोगों का अपनापन और एक माँ के दिल में दर्ज़ हो गई यादों की चमक।

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खिड़की से झाँकती ज़िंदगी के दो रंग”

बदलते दृश्य, खिड़की से दृश्य, चिड़ियों का संसार, पहाड़ और धुंध, पोस्ट बॉक्स कहानी, किताबों की अहमियत, शहरी जीवन के दृश्य, सुबह की ताजगी, प्रकृति का सौंदर्य, व्यस्त जीवन के पल, विचारशील कविता, समकालीन अनुभूति, महिला दृष्टिकोण, बदलती संवेदनाएँ

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