जंगल की आग
पलाश के दहकते फूलों से लेकर पहाड़ों पर खिलते बुरांश तक, ‘जंगल की आग’ बसंत की रंगीन और उन्मुक्त प्रकृति को आग, यौवन और अनुभूति के रूपकों में अभिव्यक्त करती है।

पलाश के दहकते फूलों से लेकर पहाड़ों पर खिलते बुरांश तक, ‘जंगल की आग’ बसंत की रंगीन और उन्मुक्त प्रकृति को आग, यौवन और अनुभूति के रूपकों में अभिव्यक्त करती है।