gulmohar
कनॉट प्लेस में रंग-बिरंगे पंखे बेचती एक छोटी लड़की, मासूम आंखों और श्रम से भरी हथेलियों के साथ

वो लड़की

‘वो लड़की’ कविता एक मासूम बच्ची के संघर्ष, श्रम और सपनों को बेहद संवेदनशीलता से चित्रित करती है। उसकी छोटी-सी दुनिया में छिपी बड़ी संभावनाएं और भावनाएं पाठक को गहराई से छू जाती हैं, और समाज की सच्चाई को उजागर करती हैं।

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