पूर्णिमा की रात वृंदावन के वातावरण में बांसुरी लिए कृष्ण और उनके सामने भावपूर्ण मुद्रा में खड़ी राधा, आध्यात्मिक प्रेम और एकात्म का प्रतीकात्मक दृश्य।

राधाकृष्ण: दो नहीं, एक भी नहीं

राधा और कृष्ण के इस काव्य-संवाद में प्रेम केवल आकर्षण नहीं, बल्कि आत्मिक एकत्व और समर्पण की अनुभूति बनकर सामने आता है—जहाँ दो अस्तित्व मिलकर राधाकृष्ण हो जाते हैं

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आलिंगन, निकटता और परमानंद : स्त्री का पूरा अस्तित्व

ओशो के डिस्कोर्स से औरत सेक्स में बहुत अधिक रुचि नहीं रखती। वह गर्माहट, गले लगाने, मित्रता और प्रेम में ज़्यादा रुचि रखती है। पुरुष अधिकतर सेक्स में रुचि रखते हैं। ये गलतफहमियाँ इस बात को दर्शाती हैं कि शायद भगवान ने दुनिया नहीं बनाई होगी — क्योंकि यहाँ कुछ भी मेल नहीं खाता। ऐसा…

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