बड़ी होटल : जब खबरें साँस लिया करती थीं
बड़ी होटल केवल एक होटल नहीं थी, बल्कि पूरे गाँव की धड़कन थी। वाल्व वाले रेडियो की गूंज में लोग अपने सुख-दुख, गर्व और शोक साझा करते थे। वहीं से देश-दुनिया की खबरें गाँव की गलियों में उतरती थीं और पोरवाल परिवार की सेवा-परंपरा ने इसे सच्चा सूचना केंद्र बना दिया।
