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बड़ी होटल : जब खबरें साँस लिया करती थीं

बड़ी होटल केवल एक होटल नहीं थी, बल्कि पूरे गाँव की धड़कन थी। वाल्व वाले रेडियो की गूंज में लोग अपने सुख-दुख, गर्व और शोक साझा करते थे। वहीं से देश-दुनिया की खबरें गाँव की गलियों में उतरती थीं और पोरवाल परिवार की सेवा-परंपरा ने इसे सच्चा सूचना केंद्र बना दिया।

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देवेनदास भाटिया: महिदपुर रोड स्टेशन की आत्मा

महिदपुर रोड का पुराना स्टेशन आज भले बदल गया हो, लेकिन इसकी ब्रिटिश-era इमारत, स्टीम इंजन की छुक–छुक, और स्टेशन मास्टर काका देवेनदास भाटिया जैसी शख्सियतें अब भी कस्बे की यादों में वैसे ही जिंदा हैं जैसे कभी प्लेटफॉर्म पर तैरता बीड़ी का धुआँ और बड़ी होटल की चाय की खुशबू।

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