gulmohar
सफेद साड़ी पहने तुलसी के पास दीप जलाती एक विधवा स्त्री

प्यार के रंग

क्या जीवनसाथी के जाने के बाद प्रेम का रंग बदल जाता है? अमिता कर की रचना ‘प्यार के रंग’ एक ऐसी स्त्री के मन की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती है, जिसके लिए पति की अनुपस्थिति में भी प्रेम, आस्था और समर्पण पहले जैसे ही हैं। बदलता है तो सिर्फ पहनावा, प्रेम नहीं।

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“अगर ‘ना’ कह देती तो मैं गुलज़ार होता”

दुनिया कहती है कि हर एक सफल पुरुष के पीछे एक स्त्री होती है!
लेकिन भैया लोग, मैं तो स्पष्टवादी हूँ, कहीं-न-कहीं से हरीशचंद्र जी की फैमिली से जुड़ा हूँ, इसलिए साफ-साफ कहता हूँ कि मेरी असफलता के पीछे मेरी बीवी का ही हाथ है!अब देखिए न, यदाकदा मेरे फेसबुक मित्र मिलते रहते हैं—कभी बाज़ार में, कभी मॉल में, कभी रास्तों पर तो कभी गार्डन में। अक्सर लोग यही कहते हैं—”अनुपम जी, आप अच्छा लिखते हैं, मज़ा आ जाता है, आप अपने लेखों को संकलित करके छपवाइए न।”

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