शान-ए-कानपुर और कानपुर रत्न सम्मान समारोह

कानपुर के हरिहरनाथ शास्त्री भवन में शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह के 118वें जन्मोत्सव के अवसर पर एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर शान-ए-कानपुर सम्मान और कानपुर रत्न सम्मान प्रदान किए गए। मुख्य अतिथि श्री किरणजीत सिंह सरदार (भगत सिंह के भतीजे) ने शहीद भगत सिंह के अद्वितीय बलिदान और क्रांतिकारी विचारों को उजागर किया और युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों — साहित्य, कला, शिक्षा, मनोरंजन, चिकित्सा, खेल, समाज सेवा — के लोगों को सम्मानित किया गया। उपस्थित जनों ने शहीदों के सपनों के भारत निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। गोल्डन क्लब ने रक्तदान, अंगदान और देहदान जैसे सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की मुहिम जारी रखने की घोषणा की।

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नेत्रदान और देहदान कर अमर हो गईं सुशीला दिवेकर

धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के बचाय अपने चिकित्सकीय प्रोफेशन को सर्वोपरि मानते हुए चिकित्सा अधिकारी डॉ. रवि दिवेकर ने अपनी माता सुशीला दिवेकर की पार्थिव देह दान कर दी। इससे पहले 77 वर्षीय दिवेकर के नेत्रदान भी कराए गए। प्रशासन और पुलिस ने ऐसी देहदानी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। शासकीय मेडिकल कॉलेज की डीन और वरिष्ठ चिकित्सकों ने इसे अनुकरणीय इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाली घटना बताया।

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