Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

राब्ता : एक ग़ज़ल

राब्ता” एक ऐसे दिल की पुकार है, जो अपने ही रिश्ते में दूरी और उदासी महसूस करता है। शिकायत यह नहीं कि मोहब्बत कम है, बल्कि यह है कि समझने और अपनाने की कमी है। ख़्वाब सजाए गए हैं, मगर उन्हें पूरा करने वाली बाहों की गर्मी नहीं मिलती। रक़ीबों की जुर्रत चुभती है, लेकिन अपने परदे की हिफ़ाज़त करने वाला कहीं और खोया रहता है। आईने में भी अब चेहरा नहीं दिखता, क्योंकि नज़रें सिर्फ़ उसी हुस्न की तलाश में हैं। चाँद भी जब उसके दर पर आता है तो उसकी तवाज़ुन खो जाती है। मोहब्बत की क़वायदें शायद काफ़िरों जैसी नहीं होतीं, तभी तो दिल देने के बाद भी सुकून कहीं और नहीं मिलता।

Read More