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ढोल थम गया, दिल थम गया

कभी शादियों में ढोल की लय और “नागिन डांस” की धुन पर दिल बेक़ाबू होकर थिरक उठते थे। अब कहीं न ताल बची है, न वो मस्ती। DJ के शोर में मानो रिश्तों की गर्माहट दब गई है। दूल्हा-दुल्हन भी कैमरे की कैद में इतने बंध गए हैं कि लगता है मानो शादी नहीं, कोई बड़ा फोटोशूट चल रहा हो। कभी घरों में उठने वाली खुशी, हँसी-ठिठोली और अपनापन अब बस दिखावे की चमक में धुंधला गया है। वक्त बदल गया है पर शायद मन अब भी उसी खोई हुई सरलता, सादगी और आत्मीयता को खोज रहा है।

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