gulmohar
सर्द सुबह में धुंध से घिरा शहर, हल्की धूप, लोग ऊनी कपड़ों में अलाव के पास बैठे हुए

सूरज ओढ़े रजाई

यह कविता शीत ऋतु के सजीव और मानवीय चित्रण को प्रस्तुत करती है, जहाँ सूरज भी रजाई ओढ़े प्रतीत होता है. ठंडी हवाएँ, पहाड़ों की बर्फ, अलाव की गर्माहट, तिल-गुड़ की सोंधी खुशबू और धूप की कोमल मुस्कान मिलकर सर्द मौसम का एक जीवंत, आत्मीय और सौंदर्यपूर्ण दृश्य रचती हैं.

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