gulmohar

वह इकलौती पेंट और गर्म इस्त्री

वो मेरी इकलौती पेंट थी। रोज़ धोकर, सुखाकर, इस्त्री करके पहनी जाती। एक ही पेंट में हम स्कूल ऐसे पहुँचते जैसे राजा बाबू हों। एक दिन जल्दी में गर्म इस्त्री से हाथ जल गया, लेकिन दर्द से ज़्यादा डर इस बात का था कि कहीं पेंट न जल जाए। उस जलन का निशान आज भी है संघर्ष की याद बनकर।

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