खामोश गुलमोहर, महकती रजनीगंधा
गुलमोहर की खामोश निगाहें और रजनीगंधा की अनकही खुशबू—दो ऐसे एहसास, जिनके बीच प्रेम कभी शब्द नहीं बनता, फिर भी सब कुछ कह जाता है।

गुलमोहर की खामोश निगाहें और रजनीगंधा की अनकही खुशबू—दो ऐसे एहसास, जिनके बीच प्रेम कभी शब्द नहीं बनता, फिर भी सब कुछ कह जाता है।