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फर्क पड़ता है रिश्तों और किसी के होने की अहमियत पर हिंदी कविता

फर्क पड़ता है

किसी के होने से सचमुच फर्क पड़ता है. उसकी आवाज़, इंतज़ार और छोटी-सी पूछताछ भी जिंदगी में बहुत कुछ बदल देती है. ‘फर्क पड़ता है’ रिश्तों की इसी अनकही सच्चाई को महसूस करती कविता है.

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