Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

श्रम आधार

यह कविता कर्म, समर्पण और श्रम के प्रति निष्ठा को दर्शाती है। इसमें कर्मवीरों की जीवन-दृष्टि को उकेरा गया है—चाहे परिणाम हार हो या जीत, वे निरंतर लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं। उनके लिए श्रम ही पूजा है और यही उनका धर्म भी। कविता यह संदेश देती है कि मन में संकल्प की ज्वाला हो, तो मनमोहक सपनों को भी साकार किया जा सकता है। ऋतुओं के बदलाव की तरह ही समय का संदेश है कि सेवा, संयम और श्रम से ही समाज सुखी बनता है। यही नहीं, कविता एक सिपाही की वीरता को भी चित्रित करती है, जो फौलादी सीने में विश्व विजय का सपना लिए रणभूमि में हुंकार भरता है। कुल मिलाकर, यह रचना कर्म, सेवा और श्रम की शक्ति का उत्सव है।

Read More