छोटे कस्बे में रात के मेले में लगी नाटक कंपनी का मंच, रोशनी, भीड़ और डांस परफॉर्मेंस का जीवंत दृश्य

1 रुपये की टिकट, हज़ारों यादें..

महिदपुर रोड के टंकी चौराहे पर, नाटक कंपनी की रौनक हर साल एक अलग ही दुनिया बुनती थी। 1 रुपये की टिकट पर रात का एक शो जहाँ नाटक के बीच में डांसर अपनी नृत्य कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती। दर्शक नोट ऊपर उठाकर सम्मान देते, डांसर की नज़रें जैसे जवाब देतीं, और कोई कलाकार तुरंत नोट उठाकर ले जाता। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं था, यह उस ज़माने की मासूमियत, उत्साह और जीवंत संस्कृति का हिस्सा था

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मंजिल मिल ही जायेगी

मंजिल पाने के लिए निरंतर प्रयास और पूरे विश्वास के साथ कदम बढ़ाते रहना ही सबसे महत्वपूर्ण है। चाहे रास्ते में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ, या कश्तियों में छेद हों, लेकिन हौसला और रवानगी कभी कम नहीं होती। अंधकार में बिखरे जाल और पाश हमारी कोशिशों को रोकने की कोशिश करेंगे, पर जज्बे की शमा जलाकर हम उनसे मुक्त हो सकते हैं।

हर तिनका, हर छोटा प्रयास मिलकर एक मजबूत घोंसला बनाता है, और आंधियों में भी यह हौंसला कायम रहता है। मुश्किलें देखने के बाद भी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि मेहनत, अभ्यास और लगन से हर समस्या का हल निकलता है।

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