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गलतियों से सीखते हुए आत्म-अन्वेषण करता व्यक्ति

गलतियाँ

शावर भकत ‘भवानी ‘ गलतियाँ भीसही होने या सही करने के लिएनैसर्गिक मार्गदर्शक बनकरस्व-पथ निर्माताबनने की ओर ले जाती हैं। विदित है किगलतियों के भय सेअकर्मण्य बने रहनागलतियों में ही विद्यमान होना है। वस्तुतः गलती नहीं करनानवीन सीखने की चेष्टा मात्र से भीपृथक हो जाना है। तर्कसंगत भी है कि गलतियाँकिए बिना सीखना असंभव है।…

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फिर से… सिर्फ अपने लिए

रेखा ने बचपन में जो कहानियाँ लिखना शुरू किया था, वो ज़िंदगी की दौड़ में कहीं खो गया था। लेकिन एक पुरानी सहेली की एक बात ने उसके भीतर की सोई हुई लेखिका को फिर जगा दिया। धूल भरी कॉपी, सूखे फूल, और अधूरी कहानियाँ — सब फिर से ज़िंदा हो उठे। कभी-कभी ज़िंदगी वहीं से शुरू होती है, जहाँ हमें लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया है।

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