Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
यशोधरा आधी रात के शांत राजमहल में अपनी गोद में शिशु राहुल को लिए खड़ी हैं। उनकी आँखों में गहरा दर्द, अकेलापन और आत्मसम्मान झलक रहा है। खिड़की से आती चांदनी उनके चेहरे को प्रकाशित कर रही है, जबकि पृष्ठभूमि में खुला द्वार सिद्धार्थ के प्रस्थान का प्रतीक है। दृश्य त्याग, विरह, मातृत्व और आंतरिक शक्ति की मार्मिक अनुभूति कराता है।

सुनो बुद्ध…

यह कविता यशोधरा के दृष्टिकोण से बुद्ध के संन्यास पर प्रश्न उठाती है। प्रेम, कर्तव्य, गृहस्थ जीवन और आत्मकल्याण के बीच के द्वंद्व को संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती है।

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जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन देते जैन मुनिराज और श्रद्धापूर्वक उपस्थित श्रद्धालु।

मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान है, इसे व्यर्थ न गंवाएं

नागदा में आयोजित धर्मसभा में मुनिराज श्री डॉ. संयमरत्न विजय जी म.सा. ने कहा कि मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान दुर्लभ है। उन्होंने जिनेंद्र भक्ति, वैरभाव त्याग और आत्मा को निर्मल बनाने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्म को जीवन का वास्तविक मार्ग बताया।

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