धुंधले सांध्य वातावरण में एक भारतीय महिला अकेली खड़ी है। उसके पास दलदल में खिला एक कमल दिखाई दे रहा है, जो देह और आत्मा के संघर्ष का प्रतीक है। पृष्ठभूमि में चट्टानें, बहता जल और धुंध आत्मबोध, तन्हाई और अस्तित्व की गहन यात्रा को दर्शा रहे हैं।

प्राण प्रतिष्ठा

प्राण प्रतिष्ठा” एक गहन प्रतीकात्मक कविता है, जिसमें देह, आत्मा, यथार्थ और तन्हाई के बीच संघर्ष को सशक्त बिंबों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। यह रचना मनुष्य के अस्तित्व, आत्मबोध और भीतर सुलगती मौन पीड़ा की मार्मिक पड़ताल करती है।

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