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कदंब तले: राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति रस से सजी भावपूर्ण कविता

कदंब तले

कदंब वृक्ष की छांव में खड़े श्याम, राधा का पिघलता मन, बांसुरी की मधुर तान और प्रेम रस की वर्षा—‘कदंब तले’ कविता राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति की अनुपम अनुभूति कराती है।

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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पेड़ लगाते लोग, हरित प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता यथार्थवादी दृश्य।

प्रकृति बदला नहीं लेती, केवल हिसाब बराबर करती है

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रस्तुत यह लेख प्रकृति और मानव के संबंधों पर गंभीर चिंतन करता है। इसमें बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वृक्षों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के दुष्परिणामों को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बताया गया है। लेख यह संदेश देता है कि प्रकृति बदला नहीं लेती, बल्कि समय आने पर अपने साथ किए गए व्यवहार का हिसाब बराबर करती है।

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एक भूखा बच्चा रोटी की ओर उम्मीद भरी नज़रों से देखता हुआ

भूख

यह मार्मिक कविता भूख, ग़रीबी और सामाजिक विषमता की उस कठोर सच्चाई को सामने लाती है, जहाँ एक ओर भोजन की बर्बादी है और दूसरी ओर एक निवाले के लिए तड़पते लाखों चेहरे। कविता मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का गहरा संदेश देती है।

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शून्य में गूँजती आवाज़ें

तेरे जाने के बाद, फूल खिलते रहे और चाँद उगता रहा, पर दुनिया बेरंग और सपाट दिखने लगी। नदी की कल-कल में संगीत नहीं, बस छलछलाहट सुनाई पड़ने लगी। परिंदों की चहचहाट भी अब चुभने लगी, क्योंकि तुम मुझसे बहुत दूर चली गई। आवाज़ भी दूँ तो शून्य से टकराकर लौट आती है।

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इंद्रधनुष

एक उजली किरण के छू जाने से मन का चमन संदल-सा हो गया। ज़िंदगी फिर एक बार ख़ूबसूरत लगी, जैसे खुला आसमान ख़्वाहिशों को नई उड़ान दे गया हो। प्रेम की तरंगें, अधरों की मुस्कान, स्वप्न-सज्जित नयन, और मन की मंज़िल को पाई लगन — हर पंक्ति प्रेम, सौंदर्य और आत्मिक उल्लास से भीगी हुई है।

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हिंदी दिवस

यह कविता हिंदी भाषा के महत्व और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करती है। इसमें बताया गया है कि हमारी भावनाएँ, प्रेम, ज्ञान और भक्ति—सभी हिंदी में अभिव्यक्त होती हैं। पहले शब्दों से लेकर वेद, उपनिषद और गीता तक, पूजा-अर्चना और भजन तक, हिंदी भाषा हमारे जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। हिंदी दिवस का यह संदेश हमें अपनी मातृभाषा को पढ़ने, लिखने और अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

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आध्यात्मिक जागरण और बसंत ऋतु का प्रतीकात्मक दृश्य

बसंत के रंग

बसंत ऋतु बाह्य सौंदर्य से आगे बढ़कर आत्मा के जागरण का संदेश देती है। यह लेख ईश्वर-स्मरण, विरह-साधना और आत्मिक प्रकाश के माध्यम से आंतरिक बसंत की अनुभूति कराता है।

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सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन में शहर के बाहर मल्टीलेवल पार्किंग में खड़े वाहन और मेला क्षेत्र की ओर श्रद्धालुओं को ले जाती शटल बसें, व्यवस्थित ट्रैफिक और साइन एज सिस्टम के साथ.

सिंहस्थ 2028 में बदलेगा ट्रैफिक मॉडल

सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन ने इस बार ट्रैफिक प्रबंधन का पूरा खाका बदल दिया है। करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए शहर के बाहर मल्टीलेवल पार्किंग विकसित की जाएगी, जहां से विशेष बसों के जरिए श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा। यह व्यवस्था पहली बार “पार्किंग टू पिलग्रिम ट्रांसपोर्ट” मॉडल के तहत लागू होगी, जिससे शहर के भीतर वाहनों की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

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पंखुड़ियों में छुपा है सेहत का राज़

गुलाब केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सेहत का संरक्षक भी है। इसकी पंखुड़ियों में छिपे गुण न केवल वजन घटाने, तनाव कम करने और त्वचा को निखारने में सहायक हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूती प्रदान करते हैं। आज के समय में गुलाब एक प्राकृतिक इलाज के रूप में फिर से लोगों की पसंद बनता जा रहा है।

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बादलों और सितारों के बीच शांत भाव से आकाश की ओर निहारती एक स्त्री

आकाश गंगा

आकाशगंगा, बादलों और सितारों के बीच खो जाने की इच्छा को व्यक्त करती यह कविता जीवन की भागदौड़ से दूर शांति, ठहराव और आत्मिक सुकून की तलाश का सुंदर चित्रण है। प्रकृति के बिंबों के माध्यम से कवयित्री ने मन की गहराइयों को स्वर दिया है।

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