फरमाइश

ज़ख्मों की जलन, स्मृतियों की लहरें और खुशी की राख सब मिलकर दिल पर ऐसा बोझ डाल देते हैं कि मुस्कुराना भी एक फरमाइश-सा लगता है। जब भीतर बुझा हुआ चिराग ही रोशनी तलाश रहा हो, तो हौसले की एक किरण भी बड़ी मुश्किल से जन्म लेती है।

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विश्व आत्महत्या प्रतिबंध दिवस पर कैंडिल मार्च 13 को

पुणे:जागतिक आत्महत्या प्रतिबंध दिवस (World Suicide Prevention Day) के अवसर पर पुणे में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने के लिए कैंडल मार्च का आयोजन किया जा रहा है। यह पहल कनेक्टिंग ट्रस्ट और रोटरी क्लब ऑफ पुणे सारसबाग की ओर से की जा रही है। मार्च शनिवार, 13 सितंबर 2025, को शाम 6 बजे संभाजी उद्यान,…

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टीआई पंवार का बड़ा कदम: ₹51,000 दान से समाज को दी प्रेरणा

टीआई मदन सिंह पंवार ने समाज सेवा की मिसाल पेश की

महिदपुर रोड में टीआई मदन सिंह पंवार ने श्मशान समिति को ₹51,000 की दान राशि देकर समाज सेवा की प्रेरणादायक मिसाल पेश की। उनके इस कदम से न केवल विकास कार्यों को बल मिलेगा, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना भी मजबूत होगी।

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संवाद और ख़्याल

आज मन संवाद के लिए तरसता है।
मौन और डिजिटल दुनिया के बीच,
वह तेज़ और धीमी रफ्तार वाला संवाद सिर्फ़ मेरी यादों में बचे हैं। आज मैं अपने पायल की छम-छम और शॉवर की बूंदों में उस मौन जुगलबंदी का अनुभव कर रही हूँ।

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वरिष्ठ कवयित्री निवेदिता श्रीवास्तव ‘गार्गी’ को मिला विद्यावाचस्पति सम्मान

हरिद्वार में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में झारखंड की साहित्य साधिका को सम्मानित किया गया हरिद्वार, 12 जुलाई 2025 — साहित्यिक जगत के लिए यह गर्व का क्षण रहा जब झारखंड की वरिष्ठ कवयित्री निवेदिता श्रीवास्तव ‘गार्गी’ को विद्यावाचस्पति सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उन्हें हरिद्वार में आयोजित एक भव्य कवि सम्मेलन के…

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स्वच्छ ऊर्जा की ओर मजबूत कदम

भारतीय रेलवे ने सकलेशपुर–सुब्रमण्य रोड घाट सेक्शन का विद्युतीकरण सफलतापूर्वक पूरा कर एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि हासिल की है. यह रेलखंड भारतीय रेलवे के सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में गिना जाता है. 28 दिसंबर 2025 को इस सेक्शन पर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का सफल ट्रायल किया गया, जिसके बाद यह खंड इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन के लिए पूरी तरह तैयार हो गया है.

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सर्द सुबह में धुंध से घिरा शहर, हल्की धूप, लोग ऊनी कपड़ों में अलाव के पास बैठे हुए

सूरज ओढ़े रजाई

यह कविता शीत ऋतु के सजीव और मानवीय चित्रण को प्रस्तुत करती है, जहाँ सूरज भी रजाई ओढ़े प्रतीत होता है. ठंडी हवाएँ, पहाड़ों की बर्फ, अलाव की गर्माहट, तिल-गुड़ की सोंधी खुशबू और धूप की कोमल मुस्कान मिलकर सर्द मौसम का एक जीवंत, आत्मीय और सौंदर्यपूर्ण दृश्य रचती हैं.

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आधा केक, पूरी खुशी

यह कहानी एक बच्चे के मन में छिपे लालच से शुरू होकर संवेदना और बाँटने की सीख तक पहुँचती है। सड़क किनारे मजदूर बच्चों को बिस्किट बाँटते देख उसका मन बदल जाता है और वह समझ पाता है कि खुशी जमा करने में नहीं, बाँटने में है।

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ना झुकती, ना रुकती — मैं नारी हूं

मैं नारी हूं। गलतियां करती हूं, पर उन्हें दोहराती नहीं। गलती से सबक लेकर आगे बढ़ना जानती हूं। सीमाओं में रहकर भी सफलता को गले लगाना चाहती हूं। अपनी लक्ष्मण रेखा स्वयं तय करती हूं, जिसे कोई लांघकर अंदर नहीं आ सकता और कोई बहरूपिया मुझे रेखा पार ले जा नहीं सकता। मैं उन्नति के शिखर को छूना चाहती हूं, पर अपने दायरों में रहकर। किसी को कुचलकर आगे बढ़ना या किसी समझौते के कारण झुकना नहीं चाहती। सफलता न मिले तो भी मंज़ूर है, लेकिन अपने किरदार को गिराना नहीं चाहती। अगर मेरे परिवार को बुरी नज़रें छू जाएं, तो काली दुर्गा बनने में मुझे देर नहीं लगती। ज़रूरत पड़े तो कंधे से कंधा मिलाने में कभी नहीं कतराती। मुझे बराबरी का दर्जा मिले या न मिले, पर मेरी शान इससे कभी घटती नहीं।

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जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन देते जैन मुनिराज और श्रद्धापूर्वक उपस्थित श्रद्धालु।

मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान है, इसे व्यर्थ न गंवाएं

नागदा में आयोजित धर्मसभा में मुनिराज श्री डॉ. संयमरत्न विजय जी म.सा. ने कहा कि मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान दुर्लभ है। उन्होंने जिनेंद्र भक्ति, वैरभाव त्याग और आत्मा को निर्मल बनाने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्म को जीवन का वास्तविक मार्ग बताया।

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