प्रकृति बदला नहीं लेती, केवल हिसाब बराबर करती है
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रस्तुत यह लेख प्रकृति और मानव के संबंधों पर गंभीर चिंतन करता है। इसमें बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वृक्षों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के दुष्परिणामों को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बताया गया है। लेख यह संदेश देता है कि प्रकृति बदला नहीं लेती, बल्कि समय आने पर अपने साथ किए गए व्यवहार का हिसाब बराबर करती है।
शून्य में गूँजती आवाज़ें
तेरे जाने के बाद, फूल खिलते रहे और चाँद उगता रहा, पर दुनिया बेरंग और सपाट दिखने लगी। नदी की कल-कल में संगीत नहीं, बस छलछलाहट सुनाई पड़ने लगी। परिंदों की चहचहाट भी अब चुभने लगी, क्योंकि तुम मुझसे बहुत दूर चली गई। आवाज़ भी दूँ तो शून्य से टकराकर लौट आती है।
हिंदी दिवस
यह कविता हिंदी भाषा के महत्व और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करती है। इसमें बताया गया है कि हमारी भावनाएँ, प्रेम, ज्ञान और भक्ति—सभी हिंदी में अभिव्यक्त होती हैं। पहले शब्दों से लेकर वेद, उपनिषद और गीता तक, पूजा-अर्चना और भजन तक, हिंदी भाषा हमारे जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। हिंदी दिवस का यह संदेश हमें अपनी मातृभाषा को पढ़ने, लिखने और अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
बसंत के रंग
बसंत ऋतु बाह्य सौंदर्य से आगे बढ़कर आत्मा के जागरण का संदेश देती है। यह लेख ईश्वर-स्मरण, विरह-साधना और आत्मिक प्रकाश के माध्यम से आंतरिक बसंत की अनुभूति कराता है।
सिंहस्थ 2028 में बदलेगा ट्रैफिक मॉडल
सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन ने इस बार ट्रैफिक प्रबंधन का पूरा खाका बदल दिया है। करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए शहर के बाहर मल्टीलेवल पार्किंग विकसित की जाएगी, जहां से विशेष बसों के जरिए श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा। यह व्यवस्था पहली बार “पार्किंग टू पिलग्रिम ट्रांसपोर्ट” मॉडल के तहत लागू होगी, जिससे शहर के भीतर वाहनों की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
पंखुड़ियों में छुपा है सेहत का राज़
गुलाब केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सेहत का संरक्षक भी है। इसकी पंखुड़ियों में छिपे गुण न केवल वजन घटाने, तनाव कम करने और त्वचा को निखारने में सहायक हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूती प्रदान करते हैं। आज के समय में गुलाब एक प्राकृतिक इलाज के रूप में फिर से लोगों की पसंद बनता जा रहा है।
