शब्द मेरे भाव मेरे

उमड़ते भावों कोशब्दों में उकेरनान जाने यह शौक !कब और कैसे पनप गयानन्हा पौधा था जोअब वृक्ष बन गयाकुछ तो बचपन से ही थाप्रकृति का सान्निध्य मिलास्वयं ही हरा-भरा हो गयापानी के स्पर्श मात्र से हीखूब फल-फूल गयाउर्वरा के सान्निध्य मेंदोगुना हो गयामानों इच्छाओं कोखुला आकाश मिल गया। निरुपमा सिंह, प्रसिद्ध साहित्यकार, बिजनौर

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मैं हाउसवाइ़फ बनना चाहती हूँ…

“कृष्णा जानती थी — उसे यही आज़ादी चाहिए थी। अपने बच्चों के लिए… अपने परिवार के लिए… एक हाउसवाइफ़ बनकर वो सबसे आज़ाद और पूर्ण महसूस कर रही थी। यह उसकी पसंद थी, समझौता नहीं।”

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लिहाफ़ : कहानी जो सुनी थी…

पूस की रात, पतले लिहाफ़ और भूख से जूझते एक परिवार की कहानी में ठंड, गरीबी और संघर्ष के बीच भी उम्मीद की रोशनी झलकती है। जब रिक्शा चला कर लाया गया आटा-दाल और मुनिया की मुस्कान से ढेबरी से ज़्यादा रौशनी उनकी झोपड़ी में फैलती है, तो यह कहानी केवल ठंड की नहीं, जुगत और जज़्बे की भी बन जाती है।

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रविवार, 13 जुलाई को मध्य रेल पर मेगा ब्लॉक
– कई एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनें प्रभावित

13 जुलाई, रविवार को मध्य रेल के मुंबई मंडल में विद्याविहार–ठाणे और कुर्ला–वाशी के बीच मेगा ब्लॉक लागू रहेगा। इस दौरान कई मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें डायवर्ट की जाएंगी और हार्बर लाइन की उपनगरीय सेवाएं रद्द रहेंगी। रेलवे ने यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और विशेष लोकल ट्रेनों की सुविधा भी उपलब्ध कराई है।

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फर्ग्युसन रोड : पुणे की धड़कन पर एक दिन

णे शहर की रगों में सिर्फ इतिहास नहीं, आज की धड़कन भी बहती है और उस धड़कन की सबसे तेज़ लय सुनाई देती है फर्ग्युसन रोड पर। यहां की सड़कों पर चलती जवान होती नई पीढ़ी, अपने सपनों के स्केच बनाते कलाकार, नए फैशन की तलाश में भटकती युवतियां, और हर नुक्कड़ पर सजे खाने-पीने के ठिकाने .सब मिलकर एक ऐसा जीवंत कोलाज रचते हैं, जिसे देखना नहीं, जीना पड़ता है। चाहे वह ‘कट्टा’ पर बैठे युवाओं की हलचल हो, या ब्रश और कैनवास के बीच गहराते रंग, हर पल कुछ नया, कुछ असाधारण घट रहा होता है। यही पुणे है. जहां हर मोड़ पर ज़िंदगी मुस्कुरा रही होती है, और हर सड़क पर एक नई कहानी जन्म लेती है।कभी-कभी शहर के किसी एक रास्ते पर चलने भर से आप उस शहर की आत्मा से मिल लेते हैं। पुणे में फर्ग्युसन रोड (एफसी रोड) एक ऐसा ही रास्ता है .जो केवल एक सड़क नहीं, एक एहसास है।

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गुरु की शरण सौभाग्य का द्वार – पं. राजरक्षितविजयजी

श्री संभवनाथ जिनालय, पुणे में आयोजित गुरु पूर्णिमा प्रवचन में पं. राजरक्षितविजयजी ने कहा – “संपत्ति भाग्य से मिलती है, लेकिन सद्गुरु सौभाग्य से मिलते हैं।” उन्होंने गुरु की सेवा को भगवान की सेवा से भी श्रेष्ठ बताया और जीवन में सद्गुरु के मार्गदर्शन की अनिवार्यता पर बल दिया।

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गुरु पूर्णिमा पर साधु वासवानी मिशन में १०८ हवनों से गूंजी श्रद्धा की स्वरधारा

साधु वासवानी मिशन, पुणे में गुरु पूर्णिमा का पर्व भक्ति, हवन और सेवा के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया गया। १०८ हवनों, भजन-कीर्तन, दीदी कृष्णा कुमारी के संदेश और जनसेवा गतिविधियों ने इस आयोजन को एक दिव्य अनुभव में बदल दिया। पूज्य साधु वासवानी और दादा जे.पी. वासवानी को समर्पित इस दिन ने श्रद्धालुओं के हृदय में गुरु के प्रति आस्था और समर्पण को और प्रगाढ़ किया।

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“कभी तो आओ… फुर्सत के इतवार बनकर”

यह कविता एक गहरी प्रतीक्षा की पुकार है—जहाँ मन किसी के आगमन की राह देख रहा है, जो कभी फुर्सत, कभी मल्हार, कभी रंग और कभी आसुओं की धार बनकर आए। भावनाओं से सजी ये पंक्तियाँ एक ऐसी उपस्थिति की चाहत हैं, जो जीवन को फिर से स्पर्श करे, संगीतमय बनाए और रंगों से भर दे।

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गुरु पूर्णिमा पर ज्ञान का दीप जला, रिश्तों की लौ दमक उठी”

विद्यालय में आयोजित गुरु पूर्णिमा समारोह ज्ञान, श्रद्धा और समर्पण का अनुपम संगम बन गया। संस्कृत नाट्य प्रस्तुति, गीता श्लोकों का पाठ, ध्यान सत्र और गुरु पूजन जैसे आयोजनों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई दी। मुख्य अतिथि एसडीएम श्री बृजेश सक्सेना एवं हार्टफुलनेस टीम की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी गरिमामय बना दिया। विद्यार्थियों द्वारा अपने गुरुजनों को सम्मानित कर गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया गया।

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