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अगर ईश्वर एक है तो हम क्यों बंटे हैं?”

धर्म और मानवता पर चिंतन करते व्यक्ति के सामने ब्रह्मांड और पृथ्वी का प्रतीकात्मक दृश्य एक इंसान का अपने सृष्टिकर्ता से सवाल: धर्म के नाम पर इतनी हिंसा क्यों?

अनुपम नीता बर्डे,, बिलासपुर

हे मेरे रचयिता, आपने हम मानुस जात की खोपड़ी के अंदर जो दिमाग नाम की लुगदी भरी है न? वही लुगदी हलचल करती रहती है, प्रश्न करती है, उत्तर मांगती है, खुश होती है, नाराज़ होती है… तो आज मैं नाराज़ हूँ… मेरी नाराज़गी आपसे ही है!!!

यदि मैं आपको अल्लाह कहूँ, यदि मैं आपको ब्रह्मा कहूँ, यदि मैं आपको गॉड कहूँ… तो मैं मुश्किलों में फँस जाऊँगा! क्योंकि मैं आपसे प्रश्न पूछना चाहता हूँ… और यदि मैं आपका नाम लेकर प्रश्न करूँ तो आपके अनुयायी, आपके भक्त मुझ पर पिल पड़ेंगे, मुझे तार-तार कर देंगे… इसलिए मैं आपको केवल “आप” से ही संबोधित करूँगा या फिर “सृष्टिकर्ता” से संबोधित करूँगा।

हे सृष्टिकर्ता, मैं मानता हूँ कि आप अनंत ऊर्जा हैं, आपने ही सारे ब्रह्मांड की रचना की है, आपने ही सारे जीव-जंतुओं की रचना की है, आपने ही केवल मनुष्य जाति को ज्ञान से परिपूर्ण किया है, लेकिन आपने स्वयं को सम्पूर्ण विश्व के मनुष्यों पर, एक साथ, एक ही बार में, प्रकट क्यों नहीं किया?

अब देखिए न, यहूदियों के अनुसार सबसे पहले उन्होंने आपको पहचाना, मुस्लिमों के अनुसार सबसे पहले आपको उन्होंने जाना और हिन्दू तो सनातन से आपको जानते ही हैं! आप तो एकमात्र सृष्टिकर्ता हैं, लेकिन इन सबने आपकी आईडी अलग-अलग बना डाली! आपका नामकरण भी अलग-अलग कर दिया गया! क्या यह संभव है कि आप, जो एकमात्र हैं, आपकी आईडी अलग-अलग नाम से बना दी जाए?

अमेरिका कहता है कि हमारे यहाँ केवल जीजस नाम की आईडी ही वैलिड है, बाकी सब फेक! अरब कहता है, हमारे यहाँ अल्लाह नाम की आईडी ही कबूल है, बाकी सब फेक और भारत कहता है, हमारे यहाँ केवल ब्रह्मा नाम की आईडी ही मान्य है, बाकी सब फेक!!!

प्रभु जी, आप चुप क्यों हैं? छोटा सा तो काम है, बस अपना स्पष्ट परिचय देकर आप विलीन हो जाइए! पूरे विश्व में आपके नाम की केवल एक ही आईडी होगी… सर्वत्र शांति होगी और आपके नामों के बीच जो कॉम्पिटिशन चलता है, आपके नाम पर जो ज़िंदगियाँ बर्बाद हो जाती हैं, सब खत्म हो जाएगा!

हमारे आदिकाल से चल रहे झगड़े-रगड़े तुरंत खत्म हो जाएंगे! देखिए न, हमास वाले “अल्लाहु अकबर” का नाम लेकर पंद्रह सौ यहूदियों का कत्लेआम करके ऐसी खुशी मना रहे थे, जैसे आप उन्हें तोहफ़े स्वरूप जन्नत में डायरेक्ट एंट्री देने वाले हैं। वहीं यहूदी लोग “यहोवा” के नाम पर पचास हज़ार बेगुनाह लोगों का कत्लेआम करके अभी भी रुके नहीं रुक रहे हैं!

हम लोगों ने भी ब्रह्मा के नाम पर ही “ब्रह्मोस” बना डाला है, जो कभी न कभी विध्वंस करेगा और हम खुश होंगे… हे प्रभु, हे रचनाकार, आप इस परिस्थिति की गंभीरता पर ज़रा ध्यान दीजिए न… मानव इतिहास में अधिकतर जितने भी खून-खराबे, लड़ाई-झगड़े हुए हैं, उसकी गर्त में कारण तो आप ही रहे हैं!

आपने स्वयं के नामकरण का जिम्मा हम पर क्यों छोड़ दिया? इतना तो पक्का है कि “आप” एक ही हैं, रचनाकार एक ही है, लेकिन हमारा झगड़ा तो नाम को लेकर ही है न?… हम सबने आपका अलग-अलग नामकरण कर रखा है! मेरा नाम सही… तेरा नाम गलत… क्या आपको नहीं लगता कि दुनिया में ज्यादातर लड़ाई-झगड़े, बैर, द्वेष, अराजकता आपके नाम पर ही है?

आपने तो हमें कोई ऐसा नियम, कानून, ग्रंथ या पोथी उपलब्ध नहीं कराया, जो आपके द्वारा लिखित हो और हम हैं कि आपके नाम पर ग्रंथ पर ग्रंथ और पोथी पर पोथी लिखे जा रहे हैं और लेखक के रूप में आपके नाम का ठप्पा लगाए जा रहे हैं!… मेरा ग्रंथ सही… तेरा गलत!

हे अद्वैत, हे रचनाकार, हमने तो आपके नाम पर अपनी-अपनी सेनाएँ भी खड़ी कर ली हैं! आपके नाम की रक्षा हेतु! आपके धर्म की रक्षा हेतु!… हे सारे ब्रह्मांड के रचयिता, क्या आप इतने कमज़ोर हैं कि आपके नाम की रक्षा के लिए हम पिस्सू टाइप के लोग अपना सीना ताने, तीर-कमान लिए, तलवार और बंदूक लिए खड़े हो जाएँ?

आपके नाम की रक्षा के लिए, आपके नाम के प्रचार के लिए हम क्रूसेडर्स बन जाते हैं, अन्य धर्मावलंबियों को मौत के घाट उतार देते हैं! आपके नाम पर हम जेहादी बन जाते हैं और बेकसूर लोगों का गला आसानी से रेत देते हैं! आपके नाम की हम सेनाएँ बनाकर नंगा नाच कर लेते हैं!… यह सब आप देखते तो अवश्य होंगे? … आपके नाम पर ही यह सब घिनौनी हरकतें?

कितने सुंदर ग्रह की रचना आपने हमारे लिए की थी! हरा-भरा… गोल आकृति का… ताकि पूरी गोलाई में हम घूमें, साथ-साथ रहें, लेकिन हम हैं कि उस गोलाई में अपनी सीमाएँ बना डालीं! ये इस्लामी राष्ट्र, ये ईसाई राष्ट्र, ये हिन्दू राष्ट्र!… और अब तो इस्लामिक बम, ईसाई बम और हिन्दू बम भी!!!

आप कब तक चुपचाप हमारे नंगे नाच को देखते रहेंगे, प्रभु?… कुछ तो करिए… अन्यथा यह तो पक्का है कि हम स्वयं ही, स्वयं को नष्ट कर डालेंगे!

माफ़ करिएगा, प्रभु, गुस्से में लिखा हूँ। क्या करूँ, मजबूर हूँ। जो लुगदी आपने खोपड़ी के अंदर भरी है, वही उफान मार रही है!!!

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