gulmohar

घर…

मैंने अपना घर किसी ईंट-पत्थर की दीवारों पर नहीं, बल्कि एक मधुर, दर्दभरी और सुरीली तान पर बनाया है। यह महज़ चार दीवारें और एक छत नहीं, बल्कि ऐसा स्थान है जहाँ भोर से लेकर संध्या और संध्या से रात तक संगीत बहता है। यहाँ संवाद की स्वतंत्रता है, त्याग और समर्पण का अहसास है, और रिश्तों के मौन बंधन भी। इस घर में पंछियों की चहचहाहट, पेड़ों की हरियाली, तितलियों के रंग और मिट्टी की गंध बसी है। यहाँ प्राणवायु संचार करती है और नादब्रह्म विचरता है। यह रंगों और सुगंधों से भरा, मिट्टी और खुले आसमान से जुड़ा एक निरामय संसार है।

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