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महाभारत की सभा में खड़ी द्रौपदी, पांडवों और भीष्म के सामने प्रश्न उठाती हुई

पुरुषार्थ

महाभारत के द्यूत क्रीड़ा प्रसंग के बाद का एक भावनात्मक और विचारोत्तेजक चित्रण है, जहाँ द्रौपदी पांडवों और भीष्म पितामह के सामने अपने अपमान और न्याय के प्रश्न उठाती हैं। यह रचना न केवल पौराणिक घटना को जीवंत करती है, बल्कि आज के समाज में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की आवश्यकता को भी उजागर करती है। जानिए सच्चे पुरुषार्थ का अर्थ क्या है।

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