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मेरे हिस्से की पीड़ाएँ हिंदी कविता के भावों को दर्शाता संघर्ष और आत्मबल का दृश्य

मेरे हिस्से की पीड़ाएँ 

मेरे हिस्से की पीड़ाएँ मुझे स्वीकार हैं, क्योंकि संघर्ष से घबराना मेरी प्रकृति नहीं। प्रेम, त्याग और आत्मबल से भरी यह कविता जीवन के हर रण में स्वयं पर विश्वास रखने की बात करती है।

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