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अधूरे प्रेम और आत्मसम्मान की हिंदी कहानी की भावुक युवती

साथ हो तुम मेरे: जब अधूरा प्रेम ही जिंदगी का सहारा बन गया

विजया डालमिया, हैदराबाद ‘साथ हो तुम मेरे’ कनिका की कहानी है, जिसे प्रेम मिला तो सही, लेकिन स्वीकार नहीं मिला। सांवले रंग को लेकर मिले अस्वीकार ने उसे भीतर तक तोड़ दिया, मगर उसने अपने प्रेम को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। कपिल उसके जीवन में साथ होकर भी साथ नहीं था, फिर भी उसकी…

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