थोड़ी सी नमी बाकी रहने दो
जब मन से संवेदनाएँ सूखने लगें और जीवन से प्रेम, करुणा तथा ममता कम होने लगे, तब थोड़ी-सी नमी बचाए रखना जरूरी हो जाता है। यह कविता इंसानियत और प्रकृति के अस्तित्व को बचाने के लिए मन में संवेदनाओं की नमी बनाए रखने का संदेश देती है।
