संजा: वह दीवार, वे गीत और जीजी के पीछे-पीछे चलता मेरा बचपन
सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वायर न्यूज़, पुणे शाम होते ही गांव की गलियों में एक अलग ही हलचल शुरू हो जाती थी. घरों के चूल्हों से उठता धुआं धीरे-धीरे आसमान में घुलता, गाय-बछड़े लौटकर अपने ठिकानों पर पहुंचने लगते और खेतों से आती हवा में मिट्टी की सोंधी गंध घुल जाती. इसी समय मेरी बड़ी…
