वर्तमान की गुफ्तगू
जब हालात असहनीय होने लगते हैं, तब बोलना और सवाल करना जरूरी हो जाता है। ‘वर्तमान की गुफ्तगू’ चुप्पी, विरोध और संवाद के बीच बेहतर भविष्य की तलाश करती एक संवेदनशील हिंदी कविता है।

जब हालात असहनीय होने लगते हैं, तब बोलना और सवाल करना जरूरी हो जाता है। ‘वर्तमान की गुफ्तगू’ चुप्पी, विरोध और संवाद के बीच बेहतर भविष्य की तलाश करती एक संवेदनशील हिंदी कविता है।