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फिर से… सिर्फ अपने लिए

रेखा ने बचपन में जो कहानियाँ लिखना शुरू किया था, वो ज़िंदगी की दौड़ में कहीं खो गया था। लेकिन एक पुरानी सहेली की एक बात ने उसके भीतर की सोई हुई लेखिका को फिर जगा दिया। धूल भरी कॉपी, सूखे फूल, और अधूरी कहानियाँ — सब फिर से ज़िंदा हो उठे। कभी-कभी ज़िंदगी वहीं से शुरू होती है, जहाँ हमें लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया है।

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