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पत्रकारिता के शुरुआती दिनों में पुरानी क्रीम और काले रंग की लूना के साथ युवा पत्रकार

मुन्ना से कीर्ति राणा

पत्रकारिता के शुरुआती दिनों में क्रीम-काले रंग की लूना सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि जिंदगी की साथी थी। नईदुनिया में प्रशिक्षु पत्रकार के पद के लिए इंटरव्यू देने के बाद भास्कर से लूना जमा कराने का नोटिस मिला। इसके बाद शुरू हुआ नौकरी, संघर्ष और नई जिम्मेदारियों का ऐसा सफर, जिसमें लूना से लेकर सेकंडहैंड चेतक तक कई यादें जुड़ गईं।

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