gulmohar
नदी के किनारे बैठी श्वेता, जो विरह की पीड़ा से निकलकर नई शुरुआत के बारे में सोच रही है।

‘रिहाई’

क्या किसी प्रियजन की स्मृतियों के साथ जीते हुए भी जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है? ‘रिहाई’ की श्वेता को नदी के सहज प्रवाह से इस सवाल का उत्तर मिलता है। यह कहानी विरह, स्मृतियों, आत्ममुक्ति और नई शुरुआत की प्रेरक यात्रा है।

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