भरोसे की डोर
क्या प्रेम में किसी को खो देने का डर जरूरी है? राघव और रिद्धिमा की कहानी बताती है कि रिश्ते केवल वादों से नहीं, बल्कि ईमानदारी, संवाद, सम्मान और भरोसे से मजबूत बनते हैं।

क्या प्रेम में किसी को खो देने का डर जरूरी है? राघव और रिद्धिमा की कहानी बताती है कि रिश्ते केवल वादों से नहीं, बल्कि ईमानदारी, संवाद, सम्मान और भरोसे से मजबूत बनते हैं।
इवा की साइकिल गायब थी और रोती हुई बच्ची बार-बार पूछ रही थी.“मम्मा, किसने ली?”
मनोरमा को तुरंत शक उसी कचरा उठाने वाले मनोज पर गया, जिसने कुछ दिन पहले साइकिल मांगने की बात कही थी। शिकायत पर मनोज को सामने लाकर खड़ा किया गया, वह केवल इतना बोल सका. “मैडम, मैंने नहीं ली… CCTV देख लीजिए।” उसी समय अरविंद का फोन आया और सच सामने आ गया.साइकिल तो उन्होंने ही मरम्मत के लिए भेजी थी।.मनोरमा के भीतर अपराधबोध भर गया. शक उसका था, गलती उसका पूर्वाग्रह।