युद्ध की समझ…
युद्ध कोई नहीं चाहता, फिर भी इतिहास गवाह है कि कई बार परिस्थितियाँ और अन्याय ऐसे मोड़ पर ले आते हैं, जहाँ संघर्ष अपरिहार्य हो जाता है। यह कविता युद्ध के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि उसकी समझ विकसित करने का प्रयास है।

युद्ध कोई नहीं चाहता, फिर भी इतिहास गवाह है कि कई बार परिस्थितियाँ और अन्याय ऐसे मोड़ पर ले आते हैं, जहाँ संघर्ष अपरिहार्य हो जाता है। यह कविता युद्ध के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि उसकी समझ विकसित करने का प्रयास है।