gulmohar
"विद्यालय के स्टाफ रूम में दो मध्यम आयु की भारतीय महिला शिक्षिकाएँ मुस्कुराते हुए घर का बना भोजन साझा करती हुईं, जो सच्ची दोस्ती, अपनापन और आत्मीय रिश्ते की भावनाओं को दर्शाता है।"

मेरी प्रिय सखी यामिनी

यह लेख दो सहकर्मियों की ऐसी आत्मीय मित्रता की कहानी है, जो समय, दूरी और परिस्थितियों के बावजूद विश्वास, सहयोग, प्रेम और अपनत्व की मिसाल बनी हुई है।

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मौन रात्रि और स्वप्निल वेदना

अँखियाँ रात भर प्रेमिल स्वप्नों में जागती रहीं और रात भोर की प्रतीक्षा में ठहरी रही। मौन ओढ़े मानिनी-सी पीड़ा सहती रही, मगर अपनी वेदनाएँ किसी से न कह सकी और गरल पीकर भी चुप रही। भावनाओं के पारिजात बिखेरकर, श्वेत वस्त्रों में सजी वह सुरभित यामिनी को पीछे छोड़ चली गई।

श्यामल मेघों से घिरी रात में दीपशिखा मद्धम पड़ गई और अमावस की निस्तब्धता में झरती रही चाँदनी। उसके अंतर्मन की कोमलता ओस की बूँदों-सी पारदर्शी थी। वही मधुरिमा उसकी लेखनी से बही और हृदय के फूलों-सी कोमल पंक्तियों में खिल उठी।

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